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Chhath Puja Special: छठ की शुरुआत कैसे हुई? जानिए इतिहास और पौराणिक रहस्य

 



🌅 Chhath Puja Special: छठ की शुरुआत कैसे हुई? जानिए इतिहास और पौराणिक रहस्य

छठ महापर्व आज भले ही आधुनिक युग में भक्ति और आस्था के साथ मनाया जाता है, लेकिन इसकी जड़ें महाभारत काल से जुड़ी हैं। क्या आप जानते हैं कि सबसे पहले यह पर्व किसने मनाया था और क्यों? आइए जानते हैं इस प्राचीन पर्व की अद्भुत कथा।


☀️ कर्ण ने की थी पहली छठ पूजा

महाभारत के अनुसार, कर्ण का जन्म कुंती के गर्भ से हुआ था, जो सूर्य देव के आशीर्वाद से संभव हुआ था। कुंती ने विवाह से पहले सूर्य देव की कृपा से कर्ण को जन्म दिया था, लेकिन समाज के डर से उन्हें नवजात को छोड़ना पड़ा।

वर्षों बाद, जब कर्ण महान योद्धा बन चुके थे, तब उन्होंने अपने पिता सूर्य देव की उपासना के लिए छठ पूजा की। यही वह क्षण था, जब इस महान पर्व की शुरुआत हुई


🙏 कर्ण और कुंती के पुनर्मिलन में छठ पूजा की भूमिका

महाभारत के युद्ध के दौरान कुंती और कर्ण का पुनर्मिलन हुआ। उस समय कुंती ने कर्ण को अपनी सच्चाई बताई।
कर्ण ने अपनी माता की भावनाओं का सम्मान करते हुए सूर्य देव को प्रसन्न करने के लिए छठ पूजा की। ऐसा माना जाता है कि इस पूजा के माध्यम से कर्ण ने सूर्य देव से शक्ति और आशीर्वाद प्राप्त किया।

यह पूजा सिर्फ धार्मिक कर्मकांड नहीं थी, बल्कि कर्ण के परिवार और समाज के प्रति उनके कर्तव्यों का प्रतीक भी बनी।


🌻 छठ पूजा का धार्मिक महत्व

हिंदू धर्म में छठ पूजा को अत्यंत पवित्र और फलदायी माना गया है। इस पर्व में भक्तजन सूर्य देव और छठी मैया से अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना करते हैं।
यह पर्व चार दिनों तक चलता है — जिसमें व्रत, स्नान, अर्घ्य और संध्या आराधना जैसे कठोर नियमों का पालन किया जाता है।

मान्यता है कि इस पूजा से मन, शरीर और आत्मा की शुद्धि होती है और भक्तों को सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य का वरदान मिलता है।


🔱 कर्ण की छठ पूजा से मिलने वाले धार्मिक संदेश

कर्ण का जीवन त्याग, आस्था और कर्तव्य का प्रतीक है। उनकी छठ पूजा से हमें कई गहरे संदेश मिलते हैं —

  • धर्म के प्रति आस्था: कर्ण ने प्रतिकूल परिस्थितियों में भी सूर्य देव की उपासना की, जो उनकी गहरी धार्मिक निष्ठा को दर्शाता है।

  • परिवार और समाज के प्रति कर्तव्य: उन्होंने अपने जीवन को समाज और परिवार के सम्मान में समर्पित किया, जिससे यह संदेश मिलता है कि कर्तव्य ही सच्ची पूजा है।


🌞 निष्कर्ष: आस्था, कर्तव्य और सूर्य उपासना का संगम

छठ पूजा सिर्फ एक पर्व नहीं, बल्कि आस्था, आत्मबल और सत्यनिष्ठा का उत्सव है।
कर्ण की कहानी हमें याद दिलाती है कि सच्ची पूजा वही है जो निस्वार्थ भाव से की जाए, और सूर्य देव सदा उन पर कृपा बरसाते हैं जो सत्य और कर्तव्य के मार्ग पर चलते हैं।


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